शुक्रवार, जुलाई 18, 2025
अपराध बोध
शनिवार, सितंबर 28, 2024
अमीर
बुद्धिमान
शुक्रवार, अगस्त 23, 2024
लौकिक जीवन
गुरुवार, अगस्त 22, 2024
इच्छाओं में छिपा है दुःखों का कारण
मंगलवार, नवंबर 01, 2022
संसार
शनिवार, अक्टूबर 29, 2022
सम्पत्ति
शुक्रवार, जुलाई 30, 2021
सभ्यता
शुक्रवार, अप्रैल 02, 2021
भगवत कृपा
गुरुवार, मार्च 25, 2021
यथामाम् प्रपद्यन्ते
ये यथामाम् प्रपद्यन्ते, तेस्तथैव भजाम्यहम् ।
मैं आलसी को रोग, चिन्तन करने वाले को ज्ञान, ईर्ष्या की दृष्टि से देखने वाले को शत्रु और पुरुषार्थी को पदार्थ के रूप में प्राप्त होता हूँ।
रविवार, जनवरी 10, 2021
कुचक्र में मानव
शुक्रवार, जनवरी 08, 2021
जीवन सूत्र
शुक्रवार, सितंबर 18, 2020
जीवन
सोमवार, सितंबर 14, 2020
सर्वश्रेष्ठ निर्माता-निर्देशक ईश्वर
सोमवार, जुलाई 27, 2020
क्रोध
सोमवार, मार्च 16, 2020
कर्म
हम रोजाना कर्म करते हैं। अध्यात्म के अनुसार,कर्म अच्छा हो या बुरा,सभी बन्धन के कारण हैं। सब सोचते हैं कि जिन्दगी मिली है कुछ कर के दिखाऊं। किसको दिखाना है? जन्म देने वाले माता पिता क्या यह जानते थे कि हम किसको जन्म देने जा रहे हैं ? बहुत से लोग जिनसे पूर्व में हमारे सम्बंध थे ,हम एक साथ पढ़े ,खेले कार्य किये, इस पृथ्वी पर ही हैं ,लेकिन हमारे लिए इस जन्म में दुर्लभ हैं। हमनें दिखाने के लिए घर बढ़ाए ,गाड़ियां बढ़ायी, जमीन बढ़ाए इत्यादि।फरेब की दुनियां बढ़ायी। हमनें ऐसे कोई कर्म नहीं किये जो इसमाया के संसार को रचने वाले मायाधीश को देखने-सुनने योग्य हो। जनार्दन।
सोमवार, फ़रवरी 24, 2020
निश्चिन्तता
यदि हम लगातार परिचित माहौल में रहते हैं,तो इससे निश्चिन्तता तो होगी,पर विकास की कोई गुंजाइश नहीं होगी।यह सर्कस पर कलावाजी वाले झूले की तरह है। जब तक झूले के साथ झूलते हैं तबतक तो सब ठीक होता है।लेकिन जब रस्सी छोड़ कर दूसरी रस्सी पकड़ने की कोशिश करते हैं तो दोनो रस्सियों के बीच की स्थिति बड़ी भयावह होती है।क्योकि उस समय हम न इधर के होते हैं न उधर के।
जो लोग भी जीवन के दूसरे आयामों के बारे में पता लगाना और अनुभव करना चाहते हैं उन सबकी यही दसा होती है।वे जीवन के दूसरे पहलू को जानना तो चाहते हैं,लेकिन अपने परिचित आयाम को एक पल भी छोड़ना नहीं चाहते।
सोमवार, दिसंबर 30, 2019
शरीर
शरीर मांस एवं रुधिर का पिण्ड है इसमें कुछ हड्डियां हैं।इसके ऊपर चमड़े का कवर है।इसमें बात,कफ,पित्त सदा बनता बिगड़तआ रहता है।इसके नौ द्वारों से गन्दगी ही निकलती है।
संसार में ममता रखना दुख का कारण है ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि संसार से आसक्ति मिटे।
जनार्दन त्रिपाठी।
रविवार, जुलाई 28, 2019
अन्दर की आवाज
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