परमॉत्मा जैसी अमूर्त सत्ता को समझने के लिए
सब जीवों से प्रेम करना सीखना चाहिए|
गुरुवार, मई 29, 2014
रविवार, मई 04, 2014
शरीर/humen body/
शरीर का तभी तक महत्व है जब तक उसमे
जीव वसता हो | शरीर में बैठे जीव के दर्शन
के आकांक्षी को ;शरीर को मंदिर की तरह
पवित्र रखने का अभ्यास करना चाहिये|
जिसकी आंखें शरीर में रहते हुवे जीव को
देख सकती है' वही देव को देख सकता है
वही परोपकार कर सकता है तथा दूसरों को
सुख सन्तोष देते हुवे स्वयं सुख की अनुभूति
कर सकता है|
जनार्दन त्रिपाठी मो 9005030949
बुधवार, मार्च 12, 2014
ईश्वर का निराकार रूप
यह हमारे अंतःकरण में दिब्य भावनाओं एवं
मस्तिष्क में दिब्य विचार के रूप में रहती है |
मनुष्य में ईश्वरीय सत्ता -भावना . ज्ञान सत्ता
एवं हलचल के रूप मे दृष्टिगोचर होती है |
बुधवार, जनवरी 01, 2014
आध्यात्म
पृथ्वी पर कुछ भी स्थाई नही है | यह जड़ चेतन
संसार एक दूसरे के सहयोग से संचालित है|
सेवा भाव से जो ब्यक्ति मानवता के विकास हेतु
काम करता है ,वह अपने नाम ,रूप एव कीर्ति
को पृथ्वी पर अमर कर देता है| ं
यह शरीर हड्डी मांस व रूधिर का पिण्ड है| इसमे
5 ग्यानिेन्द्र्यां एवं 5 कर्मेन्द्रियां हैं | भोग इन्द्रियों
के विषय हैं , भोगों में प्रवृति क्रृत्रिम व निवृति
स्वाभाविक होती है| (कामना तो कृत्रिम रूप से
होती है परन्तु कामना से निवृति स्वाभाविक हो
जाती है ) |
अहंकारी,मिथ्याचारी,ईर्षालु,रिश्वतखोर,तथा दहेज
लोभी एवं अकूत धन संगरह करने वाला मृत्योप
रांत अपने सूछ्म शरीर से स्वप्न देखते हुए मनुष्य
के समान हजारों वर्ष तक यातनाएं झेलता है|
जनार्दन त्रिपाठी
मो़ न. 9005030949
मंगलवार, नवंबर 20, 2012
धर्म का सही अर्थ है विनम्र व्यवहार
धर्म का सही अर्थ है विनम्र व्यवहार :- परमात्मा जिस पर प्रशन्न होता है उसे विनम्र और जिसपर नाराज होता है उसे क्रोधी बनाता है। यदि आपको लगता है कि आपका स्वभाव क्रोधी है।तो आप प्रभु से अपने लिए केवल विनम्रता ही मागिये।व्यक्तित्व के गुण जैसे :-पहनावा ,रहन -सहन ,वार्तालाप का तरीका और विनम्रता इत्यादि मनुष्य की सफलता पर बहुत अधिक प्रभाव डालते है। क्या नाम जपने ,तीर्थ -स्नान करने ,मन्दिर, मस्जिद,गिरिजाघर या गुरुद्वारा जाने ,दान देने ,कर्मकांड का टंट -घंट करने और अनाचार से रहते हुए प्रतिदिन पूजापाठ करने से धर्मोद्देश्य की पूर्ति हो जाएगी? धर्म का सही अर्थ है विनम्र व्यवहार। और भूखे पेट के लिए उसका सारा धर्म है भोजन जुटाना। जनार्दन त्रिपाठी मोन 9005030949.
शनिवार, नवंबर 19, 2011
ALL ARE FRIENDS
सोमवार, सितंबर 12, 2011
समय / काल
रविवार, अगस्त 28, 2011
वेद ( श्रुति )WED {SHRUTI}
शनिवार, अगस्त 06, 2011
खुश रहने के सिद्धांत
शुक्रवार, अगस्त 05, 2011
चैतन्य आत्मा
मंगलवार, मई 24, 2011
शक्ति/power.
रविवार, जनवरी 30, 2011
सब में ईश्वर
शनिवार, जनवरी 29, 2011
ईश्वर का रहस्य
शुक्रवार, जनवरी 28, 2011
धार्मिक भटकाव
बुधवार, जनवरी 26, 2011
परलोक
मंगलवार, जनवरी 25, 2011
भोग एवं कामनाएं
सोमवार, जनवरी 24, 2011
ईश्वर
रविवार, जनवरी 23, 2011
मन
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ब्रह्मसूत्र
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